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किच्छा वार्ड नंबर 2 से भाजपा प्रत्याशी सूरजमुखी ने जीत हासिल की

किच्छा वार्ड नंबर 2 से भाजपा प्रत्याशी सूरजमुखी ने जीत हासिल की .

किच्छा:  विधानसभा चुनाव के बाद विधानसभा क्षेत्र के किच्छा नगर के वार्ड नंबर 2 में कांग्रेस सभासद सुरेश कोली के निधन से खाली हुई सीट पर कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ एवं भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला की प्रतिष्ठा लगी हुई थी, जहां कांग्रेस ने सहानुभूति वोट बटोरने के लिए सभासद सुरेश कोली की विधवा यशोदा देवी को प्रत्याशी बनाया, वहीं भाजपा उक्त चुनाव में मात्र 38 वोटों से पराजित हुए पूर्व प्रधान राजकुमार कोली की पत्नी सूरजमुखी को प्रत्याशी बनाया। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना कर कड़ी मेहनत की तथा भाजपा के पूर्व विधायक श्री राजेश शुक्ला ने एक रणनीति बनाकर अपने छोटे बड़े सभी कार्यकर्ताओं को इस चुनाव में झोंका व खुद भी बराबर नजर बनाकर वार्ड में सक्रिय रहे। अंततः शुक्ला की रणनीति भारी पड़ी तथा भाजपा 645 वोटों के बड़े अंतर से यह सीट कांग्रेस से छीनने में सफल रही।
पूर्व विधायक शुक्ला ने आजादनगर के दिग्गज युवा नेता प्रदीप पुजारा को इस चुनाव का संयोजक व पूर्व बीडीसी मेंबर रमन कोली को सह संयोजक बनाया तथा नगर अध्यक्ष विवेक राय के नेतृत्व में पूरे वार्ड को 4 सेक्टरों में बांटकर मुकेश कोली, गोल्डी गोराया, लक्ष्मण खुग्गर, राकेश गुप्ता को कमान सौंपी। आखिरकार भाजपा की रणनीति, कार्यकर्ताओं की मेहनत व पूर्व विधायक राजेश शुक्ला द्वारा की गई घेराबंदी में भाजपा ने इस उपचुनाव में अपना परचम लहराते हुए 645 मतों से विजय हासिल की। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि यदि प्रचंड गर्मी में यह मतदान नहीं हुआ होता तो मत प्रतिशत 70 प्रतिशत से अधिक पोलिंग का आता और जीत का अंतर डेढ़ गुना बढ़ जाता।
 वहीं दूसरी ओर कांग्रेस शुरू से ही बैकफुट पर आ गई थी पहले प्रत्याशी का नाम मिलना, किच्छा से पूर्व सभासद धनीराम को वहां ले जाकर पर्चा भरवाना फिर वापस करवाना फिर सुरेश कोली की विधवा यशोदा को प्रत्याशी बनाना उसके बाद उसे सिंबल ना देना तथा चुनाव के दौरान छपे पोस्टरों में से विधायक बेहड व चेयरमैन दर्शन कोली का चित्र काटकर पोस्टरों को लगाना चुनाव पूर्व ही हार मान लेने का संकेत था तथा विधायक व उसके परिवार के लोगों द्वारा चुनाव में जाकर प्रचार न करने से यह भी चर्चा बनी कि इन्होंने सिर्फ चुनाव में बलि का बकरा बनाने के लिए सुरेश की विधवा यशोदा प्रत्याशी बनाया वास्तव में मदद नहीं की।

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