कैसे शुरू हुआ सरकारी ठेकों में रंगदारी का दौर:दिन दहाड़े इंजीनियर्स को AK-47 से भून डाला, हर ठेके पर अपराधियों का हिस्सा फिक्स होने लगा
बिहार में 1990 से 2000 के दशक में रंगदारी का पुराना चेहरा डॉक्टर, कारोबारी और बड़े व्यापारियों के अपहरण और फिरौती से जुड़ा था। अपराधी किसी एक परिवार या व्यक्ति को निशाना बनाते और पैसा लेकर पीछे हट जाते थे। 2005 में नीतीश सरकार आई। क्राइम कंट्रोल के साथ विकास पर फोकस किया गया। सड़क, पुल, पुलिया और दूसरी सरकारी परियोजनाओं पर काम तेजी से होने लगे। बदलते वक्त में अपराधियों ने भी कमाई का तरीका बदला। अब…
बिहार में 1990 से 2000 के दशक में रंगदारी का पुराना चेहरा डॉक्टर, कारोबारी और बड़े व्यापारियों के अपहरण और फिरौती से जुड़ा था। अपराधी किसी एक परिवार या व्यक्ति को निशाना बनाते और पैसा लेकर पीछे हट जाते थे। 2005 में नीतीश सरकार आई। क्राइम कंट्रोल के साथ विकास पर फोकस किया गया। सड़क, पुल, पुलिया और दूसरी सरकारी परियोजनाओं पर काम तेजी से होने लगे। बदलते वक्त में अपराधियों ने भी कमाई का तरीका बदला। अब…







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