साइन इन

IIT Indore अध्ययन: विरोध स्थलों की दूरी और पहुंच तय करती है लोकतांत्रिक प्रदर्शनों का असर

(श्रुति भारद्वाज) नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर दिल्ली में राजपथ (अब कर्तव्य पथ) के किनारे के लॉन कभी ‘‘तंबुओं के गांव’’ जैसे नजर आते थे, जहां देशभर से लोग अपनी समस्याओं को उठाने और सत्ता तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए यहां जुटते थे। वर्ष 1993 में विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल को जंतर-मंतर स्थानांतरित किए जाने के बाद यह स्थिति बदल गई। पिछले तीन दशक के ज़्यादातर समय में, राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-…

By · · via national
IIT Indore अध्ययन: विरोध स्थलों की दूरी और पहुंच तय करती है लोकतांत्रिक प्रदर्शनों का असर

(श्रुति भारद्वाज) नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर दिल्ली में राजपथ (अब कर्तव्य पथ) के किनारे के लॉन कभी ‘‘तंबुओं के गांव’’ जैसे नजर आते थे, जहां देशभर से लोग अपनी समस्याओं को उठाने और सत्ता तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए यहां जुटते थे। वर्ष 1993 में विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थल को जंतर-मंतर स्थानांतरित किए जाने के बाद यह स्थिति बदल गई। पिछले तीन दशक के ज़्यादातर समय में, राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-…

Visit News Source

टिप्पणियाँ (0)