अखिलेश यादव उत्तराखंडियों से माफी मांगें , उत्तराखंड के सम्मान पर कांग्रेस का दोहरा रवैया बेनकाब : दीप्ति रावत
अखिलेश यादव उत्तराखंडियों से माफी मांगें , उत्तराखंड के सम्मान पर कांग्रेस का दोहरा रवैया बेनकाब : दीप्ति रावत
अखिलेश के बयान पर कांग्रेस मौन क्यों, क्या गठबंधन के आगे झुक गया उत्तराखंड का स्वाभिमान?
उत्तराखंड के स्वाभिमान से बड़ा है क्या कांग्रेस का राजनीतिक गठबंधन?: प्रदेश महामंत्री
देवभूमि के लोगों को घुसपैठिया कहना दुर्भाग्यपूर्ण, अखिलेश यादव माफी मांगें: दीप्ति रावत
देहरादून। भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रीमती दीप्ति रावत ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहे जाने संबंधी बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और यहां के नागरिकों के सम्मान पर चोट करने वाली बयानबाजी किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। अखिलेश यादव को अपने शब्दों की गंभीरता समझते हुए उत्तराखंड की जनता से माफी मांगनी चाहिए। राजनीतिक विरोध की भी एक मर्यादा होती है, लेकिन जब राजनीतिक लाभ के लिए किसी प्रदेश के लोगों की पहचान और सम्मान को निशाना बनाया जाने लगे, तो यह केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि उस प्रदेश के नागरिकों के प्रति अपमान को दर्शाता है।
श्रीमती रावत ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। इस पावन धरती ने देश को ऐसे वीर सैनिक दिए हैं, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। यहां के युवाओं ने सेना, सुरक्षा बलों, प्रशासन और राष्ट्रसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। जिस प्रदेश के लोगों का देश की सुरक्षा और विकास में इतना महत्वपूर्ण योगदान रहा हो, उनके लिए घुसपैठिया जैसे अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण है। अखिलेश यादव को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर उत्तराखंड के नागरिकों के प्रति ऐसी टिप्पणी करने का आधार क्या है?
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को यह भी याद रखना चाहिए कि उनकी पत्नी डिंपल यादव का संबंध उत्तराखंड से है। जिस प्रदेश की बेटी से उनका पारिवारिक रिश्ता है, उसी प्रदेश के लोगों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी करना उनकी राजनीतिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है। उत्तराखंड के लोगों का सम्मान किसी राजनीतिक दल की सुविधा या गठबंधन की मजबूरी पर निर्भर नहीं है।
प्रदेश महामंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन लंबे संघर्ष, आंदोलन और अनेक बलिदानों के बाद हुआ है। रामपुर तिराहा गोलीकांड राज्य आंदोलन के इतिहास का ऐसा दर्दनाक अध्याय है, जिसे उत्तराखंड की जनता कभी नहीं भूल सकती। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में राज्य आंदोलनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई और गोलीकांड की स्मृतियां आज भी प्रदेशवासियों के मन में गहरी हैं। ऐसे ऐतिहासिक संदर्भों के बीच उत्तराखंड के लोगों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी और भी संवेदनशील हो जाती है। उत्तराखंड की अस्मिता कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि संघर्ष और बलिदान से अर्जित पहचान है, जिसका सम्मान हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।
श्रीमती दीप्ति रावत ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पर सवाल उठाते हुए कहा कि अखिलेश यादव की टिप्पणी पर कांग्रेस नेतृत्व की स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने क्यों नहीं आई है? क्या कांग्रेस के लिए उत्तराखंड की अस्मिता और स्वाभिमान से बड़ा राजनीतिक गठबंधन है? यदि कांग्रेस इस बयान से असहमत है, तो उसे सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति दर्ज कराने में संकोच क्यों हो रहा है? उत्तराखंड की जनता जानना चाहती है कि प्रदेश के सम्मान का सवाल उठने पर कांग्रेस अपने नागरिकों के साथ खड़ी होगी या राजनीतिक सहयोगियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देगी। प्रदेश की अस्मिता के मुद्दे पर दोहरा रवैया नहीं चल सकता।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती ने गोविंद बल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा और नारायण दत्त तिवारी जैसे दिग्गज नेताओं के साथ योगी आदित्यनाथ जैसे व्यक्तित्व दिए हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति और शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी वीरभूमि ने भारत के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत जैसे सैन्य नेतृत्व और अजीत डोभाल जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ के माध्यम से देश को गौरवान्वित किया है। उत्तराखंड के लोगों की राष्ट्रनिष्ठा, परिश्रम और बलिदान का इतिहास किसी के प्रमाणपत्र का मोहताज नहीं है। ऐसे प्रदेश के नागरिकों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने से पहले हर राजनीतिक नेता को अपने शब्दों और उनके परिणामों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।
भाजपा प्रदेश महामंत्री ने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर प्रदेश की जनता के सम्मान को निशाना बनाना और फिर इस मुद्दे पर चुप्पी साध लेना, दोनों ही गंभीर सवाल खड़े करते हैं। यदि कांग्रेस उत्तराखंड के स्वाभिमान के साथ खड़ी होने का दावा करती है, तो उसे अखिलेश यादव के बयान पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। केवल स्थानीय स्तर पर उत्तराखंड के सम्मान की बात करना पर्याप्त नहीं है; जब किसी राजनीतिक सहयोगी की टिप्पणी से प्रदेशवासियों की भावनाएं आहत हों, तब भी उतनी ही स्पष्टता और दृढ़ता से अपनी बात रखनी चाहिए।
श्रीमती रावत ने कहा कि भाजपा उत्तराखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और राज्य आंदोलनकारियों के बलिदान के सम्मान के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। अखिलेश यादव अपने बयान पर स्पष्टीकरण दें और उत्तराखंड की जनता से माफी मांगें। समाजवादी पार्टी अपना रुख स्पष्ट करे और कांग्रेस नेतृत्व अपनी चुप्पी तोड़े। उत्तराखंड की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके सम्मान के सवाल पर कौन उसके साथ खड़ा है और कौन राजनीतिक हितों के कारण मौन है। उत्तराखंड के स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं होगा और प्रदेश की जनता के सम्मान पर उठने वाले हर सवाल का जवाब मजबूती से दिया जाएगा।







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