दिल्ली में भारी बवाल: 'वोट चोरी' के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी समेत कई दिग्गज विपक्षी सांसद हिरासत में!
नई दिल्ली – देश की राजधानी में आज उस वक्त भारी सियासी ड्रामा देखने को मिला, जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रहे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और 'इंडिया' गठबंधन (INDIA Bloc) के दर्जनों सांसदों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद दिल्ली का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और लुटियंस दिल्ली छावनी में तब्दील हो गई है।
आकाशवाणी भवन के पास धरने पर बैठे राहुल गांधी; संसद मार्ग पूरी तरह से बंद, महिला आयोग ने पुलिस को भेजा नोटिस
दिल्ली पुलिस द्वारा कुछ देर हिरासत में रखने के बाद रिहा किए गए लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य सांसदों के साथ आकाशवाणी भवन के गेट के पास सड़क पर ही धरने पर बैठ गए हैं। राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में मनमाने बदलाव (विशेष गहन पुनरीक्षण) के जरिए देश के लोकतंत्र को हाइजैक कर लिया गया है, जो कि पूरी तरह से देशद्रोह के समान है।
इस बीच, सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करते हुए दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग और निर्वाचन सदन की ओर जाने वाले सभी मुख्य रास्तों को पूरी तरह से बैरिकेड्स लगाकर बंद कर दिया है, जिससे लुटियंस दिल्ली में भारी ट्रैफिक जाम लग गया है। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों से बदसलूकी के मामले में महिला आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट और आरोपी अधिकारी पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई का पूरा विवरण चौबीस घंटे के भीतर तलब किया है।

चुनाव आयुक्त के खिलाफ धरने पर बैठे राहुल गांधी का सरकार पर 'देशद्रोह' का आरोप; आरोपी पुलिस अधिकारी के प्रमोशन पर लगी रोक
विपक्षी सांसदों की रिहाई के बाद दिल्ली का सियासी ड्रामा और तेज हो गया है। लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं के साथ आकाशवाणी भवन के पास सड़क पर धरने पर बैठ गए हैं। धरने से सीधा हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ने मतदाता सूचियों में मनमाने बदलाव (SIR) के जरिए देश के लोकतंत्र को हाइजैक कर लिया है, जो कि सीधे तौर पर देशद्रोह (Treason) है [ref : aljazeera.com]।
इस बीच, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों के साथ कथित छेड़छाड़ और बदसलूकी के मामले में घिरे दिल्ली पुलिस के एसीपी (ACP) विवेक भगत के प्रमोशन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद विपक्षी दल और पत्रकार संघ आरोपी अधिकारी के खिलाफ एफआईआर (FIR) और तुरंत गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं। दूसरी ओर, इस मुद्दे पर 'इंडिया' गठबंधन के भीतर भी मतभेद उभर आए हैं, जहां तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) ने राहुल गांधी के इस विरोध प्रदर्शन पर तंज कसा है
इंडिया (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने घोषणा की है कि उनका अगला कदम सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल इस पूरे मतदाता सूची विवाद (SIR) को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेगा और उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली के खिलाफ ज्ञापन सौंपेगा।
पुलिस का नया एक्शन: बॉडी कैम (Body Cams) का अनिवार्य उपयोग
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों द्वारा दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी (ACP) पर लगाए गए छेड़छाड़ और बदसलूकी के आरोपों के बाद पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। भविष्य में ऐसे आरोपों से बचने और पुख्ता सबूत रखने के लिए अब सभी वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को 'बॉडी कैम' (Body Cams) पहनकर प्रदर्शन स्थल पर तैनात रहने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही इस पूरे विवाद के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में पुलिस के खिलाफ एक याचिका भी दायर की गई है।
हिरासत से रिहा होने के बाद 'सड़क पर धरना'
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों को दिल्ली पुलिस द्वारा कुछ देर हिरासत में रखने के बाद रिहा कर दिया गया है। रिहा होते ही विपक्ष ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है। राहुल और प्रियंका गांधी अपने समर्थक सांसदों के साथ आकाशवाणी भवन के गेट के पास एक पेड़ के नीचे धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने पुलिस की वहां से हटने की अपील को खारिज कर दिया और साफ कहा कि वे हर हाल में चुनाव आयोग (निर्वाचन सदन) के मुख्यालय तक जाएंगे।

🛑 बवाल की वजह: चुनाव आयोग का घेराव करने निकले थे सांसद
विपक्षी दलों का यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की मांग को लेकर निकाला जा रहा था। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रियाओं और मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है, जिसे उन्होंने 'वोट चोरी' का नाम दिया है।
जैसे ही सांसदों का हुजूम आकाशवाणी भवन के पास पहुंचा, भारी संख्या में तैनात पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद राहुल गांधी और सांसद पप्पू यादव समेत कई नेताओं को पुलिस की बसों में भरकर हिरासत में ले लिया गया।
🚨 जंतर-मंतर पर नया मोड़: महिला पत्रकारों से बदसलूकी के आरोपों से भड़का आक्रोश
इस बीच, जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जिसने आग में घी डालने का काम किया है।
- गंभीर आरोप: प्रदर्शन को कवर कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी (एसीपी) पर कथित छेड़छाड़ और बदसलूकी के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
- राजनीतिक घेराबंदी: इस घटना पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने तीखा हमला बोलते हुए गृह मंत्रालय से दोषी अधिकारी के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
- क्राइम ब्रांच को जांच: बढ़ते जन-आक्रोश और विवाद को देखते हुए दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने इस मामले की जांच तुरंत दिल्ली पुलिस की 'क्राइम ब्रांच' को सौंप दी है।
📉 आगे क्या?
संसद मार्ग, जंतर-मंतर और इंडिया गेट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। भारी संख्या में हुई हिरासतों के बावजूद विपक्षी दलों का कहना है कि वे इस लड़ाई को रुकने नहीं देंगे। विपक्ष ने इसे "लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को बचाने की जंग" करार देते हुए देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, सरकार या सत्तापक्ष की तरफ से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।








टिप्पणियाँ (0)